देहरादून। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उत्तराखंड के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए “ए.आई.-फॉर-आल” पहल शुरू की। इस इनिशिएटिव को दून यूनिवर्सिटी, आई.आई.टी. मद्रास, “स्वयं प्लस” और आई.आई.टी. मद्रास-प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के साथ मिलकर लागू और संचालित करेगी। “ए.आई.-फॉर-आल” पहल का उद्घाटन समारोह उत्तराखंड के लोकभवन में हुआ संपन्न। पद्मश्री प्रो. वी. कामाकोटी (डायरेक्टर, आई.आई.टी. मद्रास) और प्रो. सुरेखा डंगवाल (वाइस चांसलर, दून यूनिवर्सिटी) ने इस सहयोग के लिए एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए और उसका आदान-प्रदान किया। उत्तराखंड के गवर्नर ने बताया कि इस संयुक्त इनिशिएटिव के शुरुआती चरण में, “स्वयं प्लस” और आई.आई.टी. मद्रास-प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन के माध्यम से उत्तराखंड की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के छात्रों के लिए कई कोर्स पेश किए जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से ए.आई. एन एम. एल. यूजिंग पाइथन, ए.आई. इन फिजिक्स, ए.आई. इन अकाउंटिंग, ए.आई. इन केमिस्ट्री, ए.आई. फॉर एजुकेटर्स और ए.आई. फॉर अस्पिरिंग इंजीनियरस शामिल हैं। गवर्नर ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है और इसकी सीमाएं नेपाल और चीन से लगती हैं। उत्तराखंड में राज्य सरकार की 11 यूनिवर्सिटी हैं, जिनमें दून यूनिवर्सिटीय उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटीय जी.बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजीय कुमाऊं यूनिवर्सिटीय श्रीदेव सुमन उत्तराखंड यूनिवर्सिटीय वी.सी.एस.जी. उत्तराखंड यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्रीय सोबन सिंह जीना यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, एच.एन.बी उत्तराखंड मेडिकल एजुकेशन यूनिवर्सिटी शामिल हैं। इसके अलावा, यहां 100 से ज्यादा सरकारी कॉलेज, 30 से ज्यादा प्राइवेट यूनिवर्सिटी, 01 सेंट्रल यूनिवर्सिटी, 01 एन.आई.टी., 01 एम्स, 01 आई.आई.एम, 01 आई.आई.टी., 01 डी.एस.टी. संस्थान, 01 सी.एस.आई.आर. संस्थान, 03 डी.आर.डी.ओ. लैब और केंद्र सरकार द्वारा फंड किए जाने वाले कुछ अन्य संस्थान भी हैं। दून यूनिवर्सिटी के साथ सहयोग के जरिए, इन सभी संस्थानों के छात्र स्वयं प्लस और आई.आई.टी. मद्रास प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन से लाभ उठा सकते हैं।
आई.आई.टी. मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी ने बताया कि स्वयं प्लस भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है। इस पहल को आई.आई.टी. मद्रास पूरे देश में लागू कर रहा है। इसे पूरे भारत में सीखने वालों को उच्च-गुणवत्ता वाले, रोजगार-उन्मुख सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। प्रो. सुरेखा डंगवाल ने इस पहल पर और पद्म श्री प्रो. वी. कामाकोटी की उपस्थिति पर खुशी जाहिर की। प्रो. कामाकोटी पद्मश्री पुरस्कार विजेता, आई.आई.टी. मद्रास के डायरेक्टर और मौजूदा समय में हमारे देश के सबसे लोकप्रिय संस्थान निर्माता हैं। उन्होंने बताया कि प्रो. कामाकोटी एकेडमिक सेक्टर के साथ-साथ भारत की संसद में भी लोकप्रिय हैं। उनके पास पासपोर्ट नहीं है। उनका हर पल हमारे देश की प्रगति और विकास के बारे में सोचने में समर्पित है। आई.आई.टी. मद्रास पिछले कई वर्षों से एन.आई.आर.एफ. में लगातार पहले स्थान पर है।
“स्वयं प्लस” के नेशनल कन्वेनर प्रो. आर. सारथी ने बताया कि दून यूनिवर्सिटी उत्तराखंड राज्य के लिए आई.आई.टी. मद्रास की नोडल पार्टनर होगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के छात्रों को “स्वयं प्लस” और प्रवर्तक टेक्नोलॉजी फाउंडेशन के माध्यम से सहायता दी जाएगी। यह फाउंडेशन एक सेक्शन 08 कंपनी है, जिसमें सेंसर, नेटवर्किंग, एक्चुएटर्स और कंट्रोल सिस्टम पर टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास द्वारा होस्ट किया जाता है और भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इसके श्नेशनल मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्सश् के तहत फंड किया जाता है।
समारोह में प्रो. तृप्ता ठाकुर (वाइस चांसलर, उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी), प्रो. अमरीश कुमार महाजन (वाइस चांसलर, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड यूनिवर्सिटी), डॉ. हरेंद्र सिंह बिष्ट (डायरेक्टर, सी.एस.आई.आर.-आई.आई.पी. देहरादून), दक्षिणमूर्ति वी. (हेड, पी.एम.यू., स्वयं प्लस) और श्री रामू गोविंदन (चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर, आई.आई.टी. मद्रास-प्रवर्तक टेक्नोलॉजी फाउंडेशन) गणमान्य व्यक्तियों के रूप में उपस्थित थे। दुर्गेश डिमरी (रजिस्ट्रार, दून यूनिवर्सिटी) और दून यूनिवर्सिटी के विभिन्न स्कूलों और विभागों के डीन और प्रमुख भी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने उत्तराखंड के उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए “ए.आई.-फॉर-आल” पहल की शुरू